Thursday, July 14, 2016

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तेरी नज़र , नज़ारे बहुत हैं.
समंदर एक है, किनारे बहुत हैं
यारों पे अख्तियार रखता हूँ
गिर भी गया तो सहारे बहुत हैं
छोड़ दो लफ्ज़ इस शाम में
दो आँखें हैं, इशारे बहुत हैं
कोई उम्मीद नहीं सच की साहब
इस शहर में तुम्हारे बहुत हैं ,
चाँद मुबारक हो आशिक़ों को
मेरे इश्क़ को सितारे बहुत हैं 

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