Sunday, January 24, 2010

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मेरी मौत की ताकीद सुनाने वाले
मुझको मिलते है मेरे राज़ बताने वाले
मेरे होंठो की हंसी पर  हैरां हो क्यूँ 
अब भी बाकी  है मेरे घर में कमाने वाले

वक़्त का खेल मैंने भी बहुत खेला है
मुझको भी जानते है आज ज़माने वाले
चूक गया आज तीर उनका भी 
जिनको कहते थे सूरमा निशाने वाले

तेरी  हसरत में   उम्र निकलती  जाये
हम  नहीं  यादों  को  भुलाने  वाले
ये तो आँखों का नशा है उनकी
वरना और भी मिलते हैं पिलाने वाले

नाम निकला है मेरा भी गैरों में
कौन थे तेरी फेहरिस्त बनाने वाले
छोड़ दे जंग ये बात पुरानी हुई
मिट गए हमको कई लोग मिटाने  वाले

Monday, January 18, 2010

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यह  बात बड़ी बेमानी है, सांसो का मोल नहीं होता
ये जानने वाले जानते है, जीवन अनमोल नहीं होता..

शब्दों के अपने अर्थ हुए, अर्थों  क़ि अपनी परिभाषा
पर परिभाषा के मंथन में, शब्दों का मोल नहीं होता.

वो रेखाओं से हार गया, बस सपने उसके साथ रहे
इन हालातों के साये में, सपनो का मोल नहीं होता

उन संबंधो का छल कैसा ,जिन  संबंधो का नाम नहीं
इस रंग बदलती दुनिया में, रिश्तो का मोल नहीं होता

वो डूब गया जो सूरज था, और उगने वाला भी सूरज
जब रात को रोज़ अमावास हो,तारो का मोल नहीं होता